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National Government Strict’s on NGO Foreign Funding

विदेशी फंडिंग पर सरकार सख्‍त, सभी NGOs एक महीने में तय बैंकों में खुलवाएं अकाउंट

विदेश से फंड लेने वालों पर सरकार सख्त हो गई है। केंद्र सरकार ने विदेश से फंड लेने वाले सभी एनजीओ, कंपनियां या व्‍यक्तियों को 32 निर्धारित बैंकों में से किसी एक में अकाउंट खुलवाने के लिए कहा है। इसमें एक विदेशी बैंक भी शामिल है। होम मिनिस्‍ट्री की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, हाई लेवल की ट्रांसपरेंसी सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। मिनिस्‍ट्री ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि इस फंड का इस्तेमाल किसी भी तरह की देश विरोधी एक्टिविटी में न हो।

मिनिस्‍ट्री की ओर से जारी आदेश के अनुसार, बैंकों में विदेशी मदद से संबंधित अकाउंट खुलवाने का आदेश हाई लेवल की ट्रांसपरेंसी बनाने के उद्देश्‍य से दिया गया है। ये सभी निर्धारित बैंक बैंक केंद्र सरकार की पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्‍टम (PFMS) से इंटीग्रेटेड होंगे। बता दें,  मोदी सरकार ने NGOs के लिए नियम सख्‍त किए हैं और कानून का उल्लंघन करने वाले कई संस्थाओं पर कार्रवाई भी की गई है। पिछले हफ्ते गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने संसद में बताया था कि 2011 से 2017 के बीच 18,868 एनजीओ के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए।

क्‍या है आदेश? 

होम मिनिस्‍ट्री की ओर से जारी आदेश के अनुसार, फॉरेन कंट्रीब्‍यूशन (रेग्‍युलेशन) एक्‍ट 2010 के तहत किसी व्यक्ति, एसोसिएशन और कंपनी को मिलने वाली विदेशी मदद या फंड के लिए रेग्युलेशन का प्रावधान है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी मदद या कन्‍ट्रीब्‍यूशन का इस्तेमाल किसी ऐसे कार्यों में न हो जो देश हित के खिलाफ हो। इस तरह, एफसीआरए 2010 के तहत दिए गए अधिकारों के तहत केंद्र सरकार ऐसे लोगों को निर्देश देती है कि जो रजिस्‍टर्ड हों या जिन्होंने FCRA 2010 के तहत पहले अनुमति ली हो, अपने बैंक अकाउंट निर्धारित 32 बैंकों में से किसी एक में अवश्य खोल लें। यह अकाउंट 21 जनवरी 2018 तक खुल जाने चाहिए। इसके तहत एक फॉर्म भरकर लोगों को इस बैंक अकाउंट की डिटेल जानकारी मिनिस्‍ट्री को देनी होगी। केंद्र सरकार ने पहले ही फैसला किया था कि सभी बैंक, जहां एफसीआरए रजिस्टर्ड लोगों और संस्थानों ने अपने फॉरन कॉन्ट्रिब्यूशन अकाउंट्स खोले हैं, वे पीएफएमएस से जुड़ेंगे जिससे पूरी व्यवस्था ट्रांसपरेंट हो। कुछ बैंकों ने पहले ही पीएफएमएस के साथ अपने सिस्टम्स को जोड़ लिए हैं। हालांकि अब भी कुछ बैंकों ने ऐसा नहीं किया है।

National Government Strict's on NGO Foreign Fundingइन बैंकों में खोलना होगा अकाउंट

विदेशी फंडिंग लेने वाले एनजीओ, कंपनियों और व्‍यक्तियों के लिए अकाउंट खोलने के लिए 32 बैंक निर्धारित किए गए हैं। ये बैंक हैं- अबु धाबी कॉमर्शियल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, द कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया, साउथ इंडियन बैंक, आईडीबीआई बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, करूर वैश्‍य बैंक, तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड, द कैथलिक सिरियन बैंक लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक, इंड्सइंड बैंक लिमिटेड, सिटी यूनियन बैंक, सिंडीकेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, द जम्‍मू एंड कश्‍मीर बैंक लिमिटेड, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, डीसीबी बैंक लिमिटेड, मणिपुर स्‍टेट कोऑपरेटिव बैंक, विजया बैंक, बॉम्‍बे मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, येस बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, देना बैंक, बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र, केनरा बैंक, आंध्रा बैंक और एक्सिस बैंक।

एनजीओ पर सख्‍त हुई सरकार 

पिछले हफ्ते लोक सभा में किरन रिजुजू ने बताया कि नियमों के उल्‍लंघन के चलते 2011 से 2017 के बीच 18,868 एनजीओ के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए। इस कार्रवाई के बाद भारतीय एनजीओ में विदेशी फंडिंग 2015-16 के 17,773 करोड़ रुपए से घटकर 2016-17 में 6,499 करोड़ रुपए आ गई। रिजुजू ने बताया कि भारत में एनजीओ ने 2014-15 में 15,299 करोड़, 2015-16 में 17,773 करोड़ और 2016-17 में 6,499 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग हासिल की। अभी देश में करीब 10 हजार एफसीआरए रजिस्‍टर्ड एनजीओ चल रहे हैं।

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